सतारा में डॉक्टर की सुसाइड नोट से खुलासा: PSI ने की रेप, पुलिसकर्मी ने किया मानसिक शोषण; डॉक्टर समुदाय में उबाल

फलटण (सतारा), 24 अक्टूबर 2025: महाराष्ट्र के सतारा जिले के फलटण उपजिला अस्पताल में तैनात महिला डॉक्टर डॉ. संपदा मुंडे ने बुधवार रात को आत्महत्या कर ली। उनकी मौत ने पूरे जिले को सदमे में डाल दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने अपनी हथेली पर सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) गोपाल बदने पर चार बार बलात्कार करने और पुलिसकर्मी प्रशांत बनकर पर मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया। यह नोट पुलिस जांच के दौरान मिला, जिसके बाद आरोपी PSI को गिरफ्तार कर लिया गया है।

हथेली पर लिखा सुसाइड नोट, पुलिस स्तब्ध
डॉ. मुंडे ने अपने हाथ पर हिंदी में लिखा था: “PSI गोपाल बदने ने मेरे साथ चार बार बलात्कार किया, और पुलिसकर्मी प्रशांत बनकर ने मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।” यह पढ़कर फलटण पुलिस स्टेशन के अधिकारी दंग रह गए। सूत्रों के अनुसार, पिछले नौ महीनों से डॉ. मुंडे को मानसिक और शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ रहा था। मेडिकल जांच से जुड़े एक विवाद के दौरान PSI बदने से उनका टकराव हुआ, जिसके बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी थी, जिसमें चेतावनी दी थी कि यदि अन्याय जारी रहा तो वे आत्महत्या कर लेंगी। अफसोस, बुधवार रात को उन्होंने यह कदम उठा लिया।

पुलिस ने दर्ज की FIR, PSI गिरफ्तार
घटना की जानकारी मिलते ही फलटण पुलिस ने POCSO एक्ट और IPC की धाराओं के तहत PSI गोपाल बदने और प्रशांत बनकर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। PSI बदने को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि बनकर की तलाश जारी है। सतारा के पुलिस अधीक्षक (SP) ने बताया कि मामला संवेदनशील है, इसलिए जांच उच्च स्तरीय टीम को सौंपी गई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जो मौत के कारणों को स्पष्ट करेगी। स्वास्थ्य विभाग ने भी आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

डॉक्टर समुदाय और महिला संगठनों में आक्रोश
इस घटना ने डॉक्टर समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। फलटण और सतारा के अस्पतालों में काम करने वाले चिकित्सकों ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया और आरोपी की सख्त सजा की मांग की। महिला संगठनों ने सड़कों पर उतरकर “न्याय दो, अन्यथा आंदोलन” का नारा दिया। एक संगठन की प्रवक्ता ने कहा, “रक्षक ही भक्षक बन गया। महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई होती है।” महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की है, लेकिन जिले में तनाव का माहौल है।

यह मामला न केवल पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने में संस्थागत विफलताओं को उजागर करता है। जांच के नतीजे जल्द आने की उम्मीद है, ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।

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