मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद के बजट सत्र के समापन के साथ ही नए सदस्यों को लेकर चर्चा जोरों पर है। मई 2026 में उद्धव ठाकरे समेत नौ सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है, जिसके बाद शिवसेना (शिंदे गुट) से महिला कोटे में किसे विधान परिषद भेजा जाएगा, इस पर सोशल मीडिया से लेकर पार्टी के अंदरूनी हलकों में खूब बहस छिड़ गई है।
मुख्य दावेदारों में नीलम गोऱ्हे और शीतल म्हात्रे के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
नीलम गोऱ्हे vs शीतल म्हात्रे

नीलम गोऱ्हे 2002 से लगातार महाराष्ट्र विधान परिषद की सदस्य रही हैं। वे उद्धव ठाकरे गुट की करीबी मानी जाती थीं, लेकिन जुलाई 2023 में उन्होंने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो गईं। वे विधान परिषद की उपसभापति भी रह चुकी हैं और महाराष्ट्र की पहली महिला उपसभापति बनने का गौरव उनके नाम है।
बजट सत्र में विदाई के दौरान नीलम गोऱ्हे ने उद्धव ठाकरे का कोई उल्लेख नहीं किया, जबकि उन्हें उद्धव ठाकरे ने ही MLC बनाया था। इसको लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई और कुछ लोगों ने इसे अगला कार्यकाल हासिल करने की रणनीति बताया।
दूसरी ओर, शीतल म्हात्रे शिवसेना की तेजतर्रार महिला प्रवक्ता हैं। वे पूर्व में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में पार्षद (कॉर्पोरेटर) रह चुकी हैं। पार्टी सूत्रों में शीतल म्हात्रे को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
क्यों गरमा रही है बहस?
- उद्धव ठाकरे समेत 9 सदस्यों का कार्यकाल मई में खत्म हो रहा है।
- शिवसेना (शिंदे) से महिला कोटे में एक सीट खाली होने जा रही है।
- नीलम गोऱ्हे ने हाल ही में उद्धव ठाकरे पर मर्सिडीज खरीदने के आरोप लगाकर सुर्खियां बटोरी थीं।
- शीतल म्हात्रे को पार्टी में सक्रिय और आक्रामक छवि के कारण मौका मिल सकता है।
एकनाथ शिंदे गुट में यह फैसला अभी अंतिम रूप से नहीं लिया गया है। पार्टी उच्चाधिकारियों में इस पर मंथन चल रहा है। कुछ नेताओं का मानना है कि नीलम गोऱ्हे को अनुभव के आधार पर फिर मौका दिया जा सकता है, जबकि युवा और आक्रामक चेहरे के रूप में शीतल म्हात्रे को तरजीह दी जा सकती है।
राज्यसभा चुनावों में एकनाथ शिंदे पहले ही चौंकाते हुए ज्योति वाघमारे को भेज चुके हैं, इसलिए इस बार भी कोई सरप्राइज फैसला आ सकता है।
अभी तक का रुख: सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे और उनके करीबी इस मामले पर अंतिम फैसला जल्द ही ले सकते हैं। चाहे नीलम गोऱ्हे को दोबारा मौका मिले या फिर शीतल म्हात्रे को नई एंट्री दी जाए — दोनों में से किसी एक महिला नेता को शिवसेना शिंदे गुट विधान परिषद भेजने वाला है।यह फैसला न सिर्फ शिवसेना की महिला नेतृत्व को मजबूत करेगा बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डालेगा।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

